लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से कहा कि वह सदन के नियमों और परंपराओं के अनुरूप आचरण करें तथा उनसे ऐसी अपेक्षा भी की जाती है।
यह पता नहीं चल पाया कि बिरला ने राहुल गांधी के किस आचरण को लेकर यह टिप्पणी की।
बिरला ने जब यह टिप्पणी की तो राहुल गांधी सदन में मौजूद थे।
लोकसभा अध्यक्ष ने शून्यकाल के दौरान कहा, ‘‘ सदन के सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे सदन की मर्यादा और शालीनता के उच्च मादपदंडों को बनाए रखें। मेरे संज्ञान में कई ऐसी घटनाएं आई हैं कि सदस्यों के आचारण सदन की उच्च परंपराओं और मापदंडो के अनुरूप नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस सदन में पिता-पुत्री, मां-बेटी और पति-पत्नी सदस्य रहे हैं। इस परिप्रेक्ष्य में नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा है कि वह नियम 349 के तहत पालनीय नियमों के अनुसार सदन में आचारण- व्यवहार करें।’’
बिरला का कहना था कि विशेष रूप से सदन में नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा की जाती है कि वह (उपयुक्त) आचरण रखें।
इस पर कांग्रेस के सदस्यों ने कुछ कहने का प्रयास किया, हालांकि सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
वहीं,भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद मुकेश राजपूत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के उस आदेश से जुड़ा विषय बुधवार को लोकसभा में उठाया और उसकी निंदा की जिसमें कहा गया था कि ‘‘लड़की के केवल निजी अंग को पकड़ना और पायजामे का नाड़ा तोड़ना बलात्कार का अपराध नहीं है।’’
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से लोकसभा सदस्य ने सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया और सरकार से आग्रह किया कि इस तरह की टिप्पणियों के लिए इस तरह के लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की टिप्पणी से देश के 140 करोड़ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और महिलाएं असहज महसूस कर रही हैं। ऐसे लोगों को देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए।’’
राजपूत ने सरकार से आग्रह किया, ‘‘ऐसे लोगों के खिलाफ संविधान के दायरे में कार्रवाई की जाए।’’
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के आणंद में ग्रामीण प्रबंधन संस्थान को त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के रूप में विश्वविद्यालय का दर्जा देने और उसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने के प्रावधान वाला ‘त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025’ सदन में चर्चा और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया।
इसे गत तीन फरवरी को लोकसभा में पेश किया गया था।
तृणमूल सांसद सौगत राय ने विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा, ‘‘सहकारिता मंत्री अमित शाह इस विधेयक को लाए हैं, यह अच्छी बात है लेकिन मेरा डर यह है कि क्या इसके जरिए सरकार अमूल की स्वतंत्रता तो नहीं ले लेगी।’’
उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकर स्वायत्तता में नहीं, अधिकारों के केंद्रीकरण में विश्वास रखती है।
उन्होंने कहा कि उक्त विश्वविद्यालय की अकादमिक, प्रशासनिक और प्रबंधकीय स्वायत्तता रहनी चाहिए।
राय ने विश्वविद्यालय का नाम सहकारिता आंदोलन के जनक माने जाने वाले त्रिभुवन दास पटेल के नाम पर रखे जाने के कदम का स्वागत किया।
सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले देश की हर ग्राम पंचायत में प्राथमिक कृषि ऋण समिति (पैक्स) होगी और आने वाले कुछ दिनों में देश में ओला, उबर जैसी एक सहकारी टैक्सी सेवा शुरू की जाएगी।
शाह ने लोकसभा में ‘त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025’ पर चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। विधेयक में गुजरात के आणंद में ग्रामीण प्रबंधन संस्थान को त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के रूप में विश्वविद्यालय का दर्जा देने और राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने का प्रावधान है।
अमित शाह के उत्तर के बाद लोकसभा ने विपक्ष के कुछ सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने सहकारिता क्षेत्र की जरूरतों को समझते हुए एक अलग मंत्रालय बनाया और तब से देश में गांव पंचायत स्तर पर पैक्स खोलने के लिए अथक प्रयास किये जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘सहकारिता क्षेत्र में मूल इकाई पैक्स है। इसके बाद जिला और प्रदेश स्तर पर समितियां बनती हैं। हम देश की हर पंचायत तक पैक्स पहुंचाने का काम अगली बार जनता के सामने जनादेश मांगने जाने से पहले पूरा कर लेंगे।’’
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